लद्दाख जाने का सबसे अच्छा समयआपकी रूचि और क्षमता पर निर्भर करता है। लद्दाख अधिकतर भारतीय पर्यटकों की ट्रैवल लिस्ट में जरूर शामिल होता है। लद्दाख की खूबसूरती अपने आप में अनोखी है। चूंकि लद्दाख एक ठंडा और बेहद ठंडा इलाका है इसलिए आप अपनी ठंड सहने की क्षमता और रूचि के मुताबिक ही लद्दाख जाने की योजना बनाएं। लद्दाख में गर्मियों में भी न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। सर्दियों का तापमान -10 से -15 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। लद्दाख में अप्रैल से टूरिस्ट सीजन शुरू होता है जब लद्दाख में दिन का तापमान 25 डिग्री के आसपास रहता है हालांकि सर्दी में माइनस -15 डिग्री तापमान होने के बावजूद भी पर्यटक यहां आते हैं। यहां हम आपको लद्दाख में जाने के सबसे अच्छे समय के बारे में पूरी जानकारी दे रहे हैं।
अप्रैल से मध्य मई
अप्रैल वो महीना होता है जब लद्दाख में टूरिस्ट सीजन शुरू होता है। इस सीजन में पर्यटक लद्दाख आना शुरू करते हैं। अप्रैल महीने के अंत से ही त्सो मोरिरी और पेनाॉन्ग त्सो झील की बर्फ पिघलनी शुरू हो जाती है और पर्यटक यहां आना शुरू कर देते हैं। मई के पहले हफ्ते से ही श्रीनगर-लेह हाइवे खुल जाता है। जिससे पर्यटकों की आवाजाही और बढ़ जाती है। हालांकि इस दौरान खार्दुंग-ला और चांग-ला दर्रे बर्फ से ढके होने के कारण बंद रहते हैं। इस दौरान अधिकतम तापमान 25 डिग्री और न्यूनतम 5-7 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहता है।

मध्य मई से जुलाई 

जून के पहले हफ्ते से मनाली-लेह हाइवे भी खुल जाता है। इस दौरान हाइवे के दोनो ओर बर्फ की दिवार होती है जो बहुत खूबसूरत नजारा होता है। इस समय भी अधिकतम तापमान 25 डिग्री और न्यूनतम 5-7 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहता है। जून के मध्य से बची हुई बर्फ भी पिघलने लगती है जो घूमने के लिए एक माकूल समय होता है। जून महीने में साका दावा, युरू कोबग्यात और हेमिस फेस्टिवल होते हैं।अगस्त से मध्य सितंबर
यह समय लद्दाख में मॉनसून का समय होता है इस दौरान नदियां अपने पूरे प्रवाह से बहती है। इस मौसम में लैंड स्लाइड होना आम बात होता है जिससे यह सीजन घूमने के लिए थोड़ा रिस्की होता है। हालांकि यह मौसम लद्दाख में काफी अच्छा होता है और इस सीजन में भी पर्यटक घूमने आते हैं। लद्दाख में पीक सीजन अगस्त तक ही होता है। सितंबर में आपको कम किराए में होटल मिल जाएंगे। इस दौरान तापमान 21 डिग्री और न्यूनतम 5 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहता है। सितंबर महीने में कई बार बर्फबारी भी हो जाती है।मध्य सितंबर से मध्य अक्टूबर
यह मौसम भी लद्दाख में घूमने का सबसे अच्छा समय माना जाता है। इस समय लद्दाख में बारिश खत्म हो जाती है और चारो ओर रंगबिरंगा माहौल देखने को मिलता है। इस दौरान अधिकतर रोड मेंटनेंस का काम किया जाता है। इस दौरान रीड दी हिमालय रैली का आयोजन भी होता है। इस दौरान भी पर्यटक लद्दाख में रहते हैं। हालांकि इस समय तापमान थोड़ा ठंडा होने लगता है। इस सीजन में अधिकतम तापमान 14 डिग्री और न्यूनतम 1 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है।

मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर
इस दौरान लद्दाख का पूरा इलाका ठंड की चपेट में आ जाता है हालांकि इस समय भी लेह श्रीनगर हाइवे खुला रहता है लेकिन अत्याधिक ठंड होने के कारण इस समय सड़क से लद्दाख की यात्रा करने की सलाह नहीं दी जाती है। इस समय अधिकतम तापमान 7 डिग्री और न्यूनतम -6 डिग्री सेल्सियस के रहता है। झीलें पूरी तरह से जम जाती है और अधिकतर पर्यटक लद्दाख से जा चुके होते हैं। हालांकि कुछ दिलेर पर्यटक ठंड सहने की क्षमता को परखने और अलग अनुभव के लिए लद्दाख में टिके रहते हैं। नवंबर महीने में लद्दाख में पानी सप्लाई नहीं होती है और बिजली शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक केवल 6 घंटे के लिए मिलती है।

मध्य नवंबर से मार्च
यह लद्दाख का सबसे ठंडा सीजन होता है यह वो समय होता है जब यह इलाका पूरे देश से सड़क के रास्ते से कट जाता है केवल हवाई यातायात चालू रहता है लेकिन वो भी ठंड की वजह से प्रभावित रहता है। कुछ दिनो की बर्फबारी को छोड़कर नुब्रा घाटी और पेनॉन्ग त्सो तक जाने के रास्ते पूरे साल खुले रहते हैं। अडवेंचर पसंद कई पर्यटक इस सीजन में लद्दाख की प्रसिद्ध चादर ट्रेक पर ट्रेकिंग के लिए आते हैं ठंड में जंस्कार नदी पूरी तरह जम जाती है जो ठंड में आम लोगों के लिए आने जाने का रास्ता बन जाती है।

अंडमान के द्वीपसमूह को और अधिक जानना चाहते हैं तो आपको यहां के विभिन्न समुद्र तटों पर स्थित बाजार और आकर्षक आउटलेट जरूर देखने चाहिए। यहां प्राकृतिक और स्थानीय कच्चे माल से सुंदर वस्तुएं बनाई जाती हैं। यहां गन्ने के हस्तशिल्प, लकड़ी से बनाए गए सजावटी सामान और समुद्री शंख तथा मोती से बने सामान मिलते हैं। अंडमान के स्ट्रीट बाजार में खरीदारी करना आपके यादगार अनुभवों में से एक होगा।
टोपी या हैट की खरीदारी
अंडमान में भला कड़ी धूप से बचाव का उपाय किए बिना आप शॉपिंग के लिए कैसे निकल सकते हैं? अगर आप अपने घर से हैट (एक प्रकार की टोपी) लेकर नहीं आए हैं, तो पोर्ट ब्लेयर के ट्रैंडी मार्केट से 1-2 खरीद लें। इसके साथ ही जब आप बीच पर आराम फरमाने जाएंगे तो आपके पास सेरोंग (बीच पर पहना जाने वाला एक तरह का परिधान) होना भी उतना ही जरूरी है। अंडमान के बाजारों में विभिन्न रंगो और आकर्षक डिजाइन के साथ सेरोंग आसानी से मिल जाते हैं।अपने घर को लकड़ी के बने सामान से सजाए
पोर्ट ब्लेयर बाजार में लकड़ी के बने स्मृति चिन्ह बहुतायत में हैं जो आपके घर के अंदरूनी हिस्सों को एक अनूठा स्पर्श देंगे। शानदार लकड़ी की प्रतिमाओं से लेकर घर से जुड़े सामान (चम्मच, बर्तन और ग्लास) और विभिन्न प्रकार के फर्नीचर तक, सभी वस्तुओं को चमकदार ढंग से पीतल के पेनलिंग और सुनहरी परत से सजाया जाता है।शंख और मोतियों की माला
बीच टाउन में बने सामानो की बात करें तो समुद्र के अंदर से लाई गई सामग्रियों से बने सामानों के आगे बाकी सारी वस्तुओं का कोई मोल नहीं है। यहां के बाज़ार चमकदार मोतियों से बनी माला या रंगीन शंख से बने कंगन (ब्रेसलेट) आदि विभिन्न प्रकार के आभूषणों से भरे पड़े हैं। यहां समुद्री गहने कानूनी रूप से बनाये जाते हैं, इसलिए जब भी आप शॉपिंग के लिए आएं तो अपने बैग में इन सामानों के लिए जगह जरूर रखें।

बांस की वस्तुओं की खरीदारी करें
पोर्ट ब्लेयर के स्ट्रीट बाजारों में छोटे बांस की मूर्तियां, चटाई और सुंदर शो पीस की भरमार है। निकोबार के आदिवासी कारीगरों द्वारा हाथ से की गई नक्काशी के साथ, ये छोटी-छोटी वस्तुएं शानदार उपहार सामग्रियां होती हैं। बांस से बने ये सामान अंडमान में खरीदारी के लिए सबसे उत्तम चीजे हैं और ये सभी आपकी यादगार वस्तुओं के संग्रह की शोभा भी बढ़ाती हैं। ईख से बनी टोकरियां, हैंडबैग, लेम्पशेड और मुखौटें आदि सामान आप यहां खरीद सकते हैं।

प्रसिद्ध अबरदीन बाजार जाएं
राजधानी पोर्ट ब्लेयर के मुख्य शॉपिंग केंद्र ‘अबरदीन बाजार’ में खरीदारी किए बिना आपकी अंडमान की यात्रा पूरी नहीं हो सकती है। बाजार की गलियां घर में इस्तेमाल होन वाले कई प्रकार के सामानों से भरी पड़ी हैं। सुंदर शो पीस से लेकर समुद्र तट पर पहनने के कपड़े और दूसरे सामान तक यहां सब कुछ मिल जाएगा। जब आप इन गलियों में घूम कर थक चुके होंगे तो अपनी भूख मिटाने के लिए इस द्वीपसमूह के मशहूर और स्वादिष्ट परांठों का आनंद लें। अगर आपका मोतियों का हार या मोतियों की अन्य कोई वस्तु खरीदने की इच्छा है तो अरबदीन बाजार के अलावा और कहीं जाने की जरूरत नहीं है। यहां प्रत्येक व्यक्ति के लिए कुछ न कुछ मिल ही जाएगा। अगर आप बहुमूल्य जेमस्टोन्स खरीदना चाहते हैं तो भी आप कहीं मत जाइए, बस इसी बाजार में अपनी नजरें गढ़ाए रखें।

इनके अतरिक्त गोलघर, जंगलीघाट, प्रेमनगर और देलानिपुर जैसी जगहें भी शॉपिंग के लिए बढ़िया स्थान हैं। सरकार से अधिकृत दुकानों पर बेचे जाने वाले उत्पाद कानूनन वैध होते हैं, इसलिए पर्यटकों को इन्हें घर ले जाने में भी किसी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता है। हालांकि विदेशी पर्यटकों को एक बार पता कर लेना चाहिए कि ये सामान उनके देश में ले जाना मान्य है या नहीं।

 

गोवा भारतीय पर्यटकों की पर्यटन सूची में टॉप पर रहता है अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो 15 अगस्त या उसके बाद गोवा घूमने की योजना बना रहे हैं तो गोवा सरकार के नए फरमान के बारे में जान लें। गोवा में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर पूरी तरह से बैन की तैयारी हो चुकी है जिसे 15 अगस्त से लागू कर दिया जाएगा। अगर किसी ने नियम तोड़ा तो उसपर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

गोवा बीच पर नहीं पी सकते बीयर या शराब

बीच एक सार्वजनिक स्थान है जहां कोई भी व्यक्ति आ सकता है इसलिए गोवा के दूसरे स्थानों के साथ बीच पर भी बीयर या शराब पीना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। अगर आपको शराब या बीयर पीनी है तो नजदीकी रेस्तरां में जाकर पी सकते हैं। मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर ने घोषणा करते हुए कहा कि 15 अगस्त से गोवा के सभी सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर पूरी तरह से बैन होगा।

नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना
मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने नए नियम की घोषणा तो कर दी है लेकिन नियम तोड़ने पर कितना जुर्माना होगा इसका जानकारी अभी नहीं दी गई है। इसके अलावा गोवा के बीच और शहर में प्लास्टिक बैग से गंदगी फैलाने वालों और इसका इस्तेमाल करने वालों पर भी जुर्माना लगाया जाएगा। प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल करने पर जुर्माने की राशि को 100 रुपए से बढ़ाकर 2500 रुपए कर दिया गया है।

क्यों लग रही है पाबंदी
यह पाबंदी दरअसल सरकार पर्यटकों की शिकायत के बाद ही लागू कर रही है। शराब पीने के बाद बोतलों के कचरे और शराब पीने के बाद होने वाली महिला पर्यटकों की शिकायत के बाद यह फैसला लिया गया है। इससे पहले भी सरकार ये नियम लागू कर चुकी है लेकिन अब इसे सख्ती से लागू किया जाएगा।

कहां पी सकते हैं शराब
ऐसा नहीं है कि अब गोवा में शराब या बीयर पीना पूरी तरह से बैन हो गया है आप इसे लाइसेंस प्राप्त शेक्स या रेस्तरां में पी सकते हैं इसपर कोई पाबंदी नहीं है बीच के सामने स्थित किसी रेस्तरां या शेक्स में शराब पीने पर कोई रोक नहीं है।

 

कैसे पहुंचे मसूरी, जान लें पहुंचने के सभी विकल्प

मसूरी, उत्तराखंड का एक लोकप्रिय हिल स्टेशन है। यहां अक्सर पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। अगर आप भी मसूरी घूमना चाहते हैं तो पहले यहां पहुंचने के विकल्पों पर गौर कर लें। मसूरी एक हिल स्टेशन है मसूरी सीधे तरीके से वायु और रेलमार्ग के जरिए देश के किसी भी शहर से नहीं जुड़ा है।
यहां पहुंचने के लिए पर्यटक अधिकतर सड़कमार्ग का विकल्प ही चुनते हैं। अगर आप देश के किसी दूर के शहर जैसे मुंबई से मसूरी आना चाहते हैं तो पहले आपको देहरादून तक हवाई मार्ग या रेलमार्ग का विकल्प चुनना होगा जो ज्यादा सुगम हैं यहां हम आपको मसूरी पहुंचने के सभी विकल्पों की जानकारी दे रहे हैं।
                                      वायुमार्ग

मसूरी में कोई भी एयरपोर्ट नहीं है मसूरी से सबसे नजदीक देहरादून का जौलीग्रांट हवाई अड्डा है। इस एयरपोर्ट की मसूरी से दूरी करीब 59 किलोमीटर है। अगर आप मुंबई से मसूरी पहुंचना चाहते हैं या लखनऊ से मसूरी पहुंचना चाहते हैं तो देहरादून तक की फ्लाइट पकड़ सकते हैं। देहरादून देश के अधिकतर शहरों से हवाई मार्ग के जरिए जुड़ा है। मुंबई से देहरादून पहुंचाने में हवाई जहाज 2.30 घंटे लेता है। इसके आगे का सफर आप सड़क से कर सकते हैं देहरादून से मसूरी पहुंचने के लिए आप कैब किराए पर ले सकते हैं या बस से मसूरी जा सकते हैं। देहरादून से मसूरी जाने के लिए नियमित बस सेवा उपलब्ध है।

रेलमार्ग
मसूरी में कोई रेलवे स्टेशन नहीं है आप देहरादून तक रेल से आ सकते हैं और इसके आगे का सफर सड़क के रास्ते कर सकते हैं रेलवे स्टेशन के बाहर से ही आपको बस या कैब मसूरी जाने के लिए मिल जाएगी। दिल्ली से मसूरी पहुंचने के लिए आप शताब्दी ट्रेन पकड़ सकते हैं जो देहरादून तक जाती है। इसके अलवा मुंबई और लखनऊ से भी देहरादून के लिए लिए सीधी ट्रेन उपलब्ध है। दिल्ली से देहरादून के लिए कई खास ट्रेन भी चलती है जैसे मसूरी एक्सप्रेस और निजामुद्दीन एसी स्पेशल आदि। इसके अलावा मुंबई से देहरादून के लिए भी सीधी ट्रेन सेवा उपलब्ध है जो बान्द्रा टर्मिनस से बनकर चलती है। मुंबई से देहरादून पहुंचने में ट्रेन 30-42 घंटे लेती है। इसके अलावा जयपुर से मसूरी के लिए उत्तरांचल एक्सप्रेस सीधी ट्रेन है जो देहरादून उतारती है लेकिन यह ट्रेन केवल शनिवार वाले दिन ही चलती है।

सड़क मार्ग
सीधे मसूरी तक केवल सड़क के रास्ते ही जा सकते हैं। आप कैब, निजी कार या फिर बस से भी मसूरी जा सकते हैं। स्टेट ट्रांसपोर्ट और निजी ऑपरेटर्स की लग्जरी बसें नियमित तौर पर देहरादून और दिल्ली से उपलब्ध रहती हैं। अगर आप दिल्ली से मसूरी रोड के रास्ते जा रहे हैं तो नैशनल हाइवे 58 पर चलिए फिर देहरादून तक नैशनल हाइवे 72 ए को पकड़ लिजिए देहरादून के बाद न्यू मसूरी रोड पर चलिए जो सीधा मसूरी ले जाएगा। लखनऊ से मसूरी के लिए सीधी बस सेवा उपलब्ध है आप यूपी ट्रांसपोर्ट की बस से भी लखनऊ से मसूरी जा सकते हैं या निजी टूर ऑपरेटर्स का विकल्प चुन सकते हैं। लखनऊ से मसूरी पहुंचाने में बस करीब 14 घंटे लेती है। इसके अलावा दिल्ली से मसूरी पहुंचने में बस 7.30-6.30 घंटे लेती है। दिल्ली से मसूरी की दूरी करीब 290 किलोमीटर है जबकि लखनऊ से मसूरी की दूरी करीब 800 किलोमीटर है।

कालका-शिमला रूट पर चलने वाली 2 हॉलिडे स्पेशल ट्रेनें बंद

समर वकेशन्स के दौरान शिमला जाने वाले टूरिस्ट्स की बढ़ती संख्या को देखते हुए पर्यटकों की सुविधा के लिए रेलवे ने कालका-शिमला रूट पर 2 हॉलिडे स्पेशल ट्रेनें चलायीं थीं जिन्हें अब बंद कर दिया गया है। इस रूट पर सफर करने वाले यात्री अब इन दोनों ट्रेनों की सुविधा का लाभ नहीं उठा पाएंगे। रेलवे ने इसी साल 20 अप्रैल से कालका-शिमला रूट पर दो स्पेशल ट्रेनों का परिचालन शुरू किया था।

समर वकेशन्स में शुरू की गई थीं स्पेशल ट्रेनें

हर साल सरकार की ओर से गर्मी की छुट्टियों के दौरान शिमला आने वाले पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए हॉलिडे स्पेशल ट्रेनें चलायी जाती हैं। कालका से शिमला के बीच हर सुबह 7 बजे चलने वाली 52445 और शिमला से कालका के लिए हर दिन दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर चलने वाली 52443, इन दोनों नंबर वाली हॉलिडे स्पेशल ट्रेनों का परिचालन अब बंद कर दिया गया है।

यह भी पढ़ें: कालका-शिमला हेरिटेज ट्रैक पर अब इस स्टेशन तक जाएगी टॉय ट्रेन

हजारों पर्यटकों ने इन ट्रेनों में किया सफर
कालका से शिमला के बीच चलने वाली हॉलिडे स्पेशल टॉय ट्रेन में हर साल की तरह इस साल भी हजारों पर्यटकों ने सफर किया और इस रेल रूट पर सफर करने वाले पर्यटकों की संख्या में हर साल लगातार इजाफा देखा जा रहा है। कालका-शिमला रूट पर चलने वाली ज्यादातर ट्रेनों में काफी पहले ही अडवांस बुकिंग हो जाती है। इस वजह से सरकार पर्यटकों की बढ़ती संख्या और सुविधा के मद्देनजर हर साल स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था करती है।

मांग घटने पर बंद कर दी गईं ट्रेनें
लेकिन अब चूंकि मॉनसून का सीजन शुरू हो चुका है और इस रूट पर पर्यटकों की संख्या में कमी देखी जा रही है और इन ट्रेनों में सीट बुक करने वाले लोगों की संख्या भी घट रही है। ऐसे में रेलवे ने इन हॉलिडे स्पेशल सीजनल ट्रेनों को बंद करने का फैसला किया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here