दिल्ली में घूमने के लिए इतना कुछ है, जिसके बारे में तो बहुत से लोग जानते ही नहीं। क्योंकि ठंड बहुत है, ऐसे में शहर से बाहर जाने की प्लानिंग करना मुश्किल हो रहा है तो उदास न हों। भीड़भाड़ से दूर दिल्ली की ये अनछुई जगहें की खूबसूरती आपको फोटोग्राफ्स लेने पर मजबूर कर देगी। साथ ही यहां के इतिहास के बारे में भी जानने का मौका मिलता है जिससे आपको अपने शहर का पूरा ज्ञान हो सके।

इल्तुतमिश का मकबरा
कुतुबमीनार के पास बने इस मकबरे को देखने बहुत ही कम लोग आते हैं। यह मकबरा कुछ साल पहले ही पर्यटकों के लिए खोला गया है। इस मकबरे के ऊपर छत नहीं है। यहां छत बनाने का प्रयास किया गया लेकिन हर बार छत गिर जाती थी। इस मकबरे पर सुंदर नक्काशी की गई है।

गंधक की बावली
दिल्ली के मेहरौली में भारत की सबसे पुरानी बावली बनी हुई है। इस बावली में बारिश का पानी इकट्ठा किया जाता था। इस कुएं में सल्फर मिले होने की वजह से इसमें गंध आती है। पांच मंजिला यह कुआं अपने गुणकारी पानी की वजह से भी जाना जाता है।

सतपुला ब्रिज
यह एक प्राचीन जल संचयन बांध था, जो दिल्ली के मालवीय नगर में स्थित है। इसके निर्माण का श्रेय सुल्तान मुहम्मद शाह तुगलक के शासनकाल को दिया जाता है। सतपुला ब्रिज 7 ब्रिजों को जोड़कर बनाया गया है। सतपुला ब्रिज आज किसी गुमनामी में खो चुका है।

आधम खान का मकबरा
आधम खान के मकबरे का निर्माण 16वीं सदी में हुआ था। 1561ई. में इस मकबरे का निर्माण हुआ था। कभी यह मुगल शासक अकबर को बड़े प्रिय थे। अगर मुगलों के बारे में जानने की जिज्ञासा हो तो एक बार इस मकबरे का रुख करें।

रजिया-अल-दीन-मकबरा
दिल्ली की पहली महिला शासक रजिया का मकबरा गुमनाम जगह में से एक है। कहते हैं कि रजिया के पति अल्तुनिया की सेना ने बगावत कर उन्हें मार दिया था और इसी जगह पर दफनाया गया था। यह मकबरा तुर्कमान गेट के पास बना हुआ है।

संजय वन
वसंत कुंज और मेहरौली के पास संजय वन स्थित है। यह 783 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यूं तो यह एक पार्क है, लेकिन जंगल जैसा लगता है। चारों तरफ हरियाली के साथ कई पक्षियों की प्रजातियां भी हैं। एडवेंचर के शौकीन हैं तो यहां जाएं।

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