Chole Bhature Of Delhi

अगर आप भी दिल्‍ली की ट्रिप पर जा रहे हैं और फूड लवर हैं तो कुछ खास जगहों के छोले-भटूरे खाना न भूलें, वरना आपको लगेगा कि काफी कुछ मिस कर दिया। दिल्‍ली की इन खास जगहों पर मिलने वाले छोले-भटूरों का स्‍वाद बेहद लजीज है। जी हां यहां छोले-भटूरों के साथ मसालेदार पिंडी छोले सर्व किए जाते हैं। हालांकि आजकल पिंडी ही नहीं, कहीं काबुली तो कहीं पंजाबी छोलों के साथ भी भटूरे सर्व किए जाते हैं। हां इन छोले-भटूरों की एक खास बात और है कि ये बेहद साफ-सफाई से बनाये जाते हैं। यानी कि स्‍वाद के साथ ही आपकी सेहत का ख्‍याल रखा जाता है। तो फिर आप भी अपनी चेकलिस्‍ट में इन खास जगहों के नाम जोड़ लीजिए।

नॉर्थ दिल्‍ली की चाचे दी हट्टी कमला नगर मेन मार्केट में, बंग्लो रोड से मंडेलिया रोड पर आएं, तो पहली राइट गली की छोटी-सी दुकान ‘चाचे दी हट्टी’ रावलपिंडी के छोले-भटूरे खिलाने के लिए जानी जाती है। दिल्ली वालों को पिंडी छोलों का स्वाद चखाने का श्रेय इसी परिवार को जाता है। आजादी के वक्त रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) से आकर, 1958 के आस-पास प्राणनाथ सलूजा ने जोरदार पिंडी छोलों से क्या रिझाया, आज उनके बेटे कंवल किशोर और प्रवीण सलूजा स्वाद बरकरार रखे हुए हैं।

टाइमः सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक ही, छुट्टीः हर संडे, रेटः प्लेन 50 रुपये की, आलू स्टफ्ड भटूरे की प्लेट 55 रुपये की, नजदीकी मेट्रो स्टेशनः यूनिवसिर्टी, करीब 2 किमी दूर

साफ-सफाईः तलने वाला रिफाइंड रोज बदलते हैं।

ईस्‍ट दिल्‍ली के शर्मा भटूरे वाले
शाहदरा के छोटा बाजार में एमसीडी के पॉलीक्लीनिक के बाद राइट साइड की पांचवीं-छठी मेमवाली गली के भीतर ‘शर्मा भटूरे वाले’ नाम की दुकान ‘अनिल छोले-भटूरे वाले’ के तौर से ज्यादा मशहूर है। छोले काबुली हैं, खुद के पिसे मसालों में पकाते हैं और एकदम गले-गले हैं। भटूरे पहले से तल कर रखते हैं और गर्म कर-कर सर्व करते हैं। 1975 से इसी गली के मुहाने पर साइकल से छोले-भटूरे खिलाने शुरू किए महेन्द्र पाल शर्मा ने और फिर उनके बेटे अनिल और विनोद के साथ-साथ पोता प्रतीक शर्मा दुकान से धूम मचाए हुए हैं।

टाइमः सुबह 6:30 से सुबह 10 बजे तक ही, छुट्टीः कोई नहीं, रेटः 70 रुपये की फुल प्लेट, 40 की हाफ, नजदीकी मेट्रो स्टेशनः शाहदरा, आधा किमी दूर

साफ-सफाईः डिस्पोजेबल प्लेट इस्तेमाल करते हैं। स्टील का साफ-सुथरा कांउटर है।

सेंट्रल दिल्ली के सीता राम दीवान चंद
पहाड़गंज की चूना मंडी इलाके में बंद हो चुके ‘इम्पीरियल’ सिनेमा के नजदीक ‘सीता राम दीवान चंद’ नाम की दुकान के छोले-भटूरे के 1950 से चर्चे हैं। छोले के साथ भटूरे भी खास हैं – पनीर की स्टफिंग वाले। पहले से तले भटूरों को तवे पर सेक-सेक कर, मौसम मुताबिक आम, आंवला, मिर्च, गाजर आदि के अचार और प्याज के साथ परोसते हैं। छोले-भटूरे का सफर अपने पार्टनर दीवान चंद के साथ मिलकर सीता राम कोहली ने शुरू किया। आज बेटे प्राण नाथ कोहली और पोते पुनीत कोहली उसी स्वाद को कायम रखे हुए हैं।

टाइमः सुबह 8 से शाम 5:30 बजे तक, छुट्टीः कोई नहीं, रेटः 65 रुपये की फुल प्लेट, 35 की हाफ, नजदीकी मेट्रो स्टेशनः रामकृष्ण आश्रम मार्ग, आधा किमी दूर

साफ-सफाईः डिस्पोजेबल प्लेट इस्तेमाल करते हैं। कढ़ाही का रिफाइंड भी बदलकर नया भरते रहते हैं।

पुरानी दिल्‍ली के नंद भटूरे वाले दी हट्टी
सदर बाज़ार के बीचोंबीच पान मंडी में, क्रॉकरी मार्केट की गली की नुक्कड़ पर ‘नंद भटूरे वाले दी हट्टी’ के देसी घी के छोले-भटूरे बेहतरीन हैं। इसी परिवार की बगल की दुकान ‘नंद दी हट्टी’ के छोले-भटूरे भी बराबर स्वादिष्ट हैं। खास यह है कि छोले बगैर लहसुन-प्याज के हैं। 1948 से हैं और यहीं रेहड़ी से शुरूआत की नंद लाल मक्कड़ ने। और 1993 से उनके बेटों ओम प्रकाश, चंद्र प्रकाश, सुरेन्द्र प्रकाश और सुभाष चंद मक्कड़ आजू-बाजू दो दुकानें से स्वाद चखा रहे हैं। अब तो तीसरी पीढ़ी पुश्तैनी रेसपी के दम पर वाहवाही बटोर रही है।

टाइमः सुबह 10:30 से शाम 5 बजे तक, छुट्टीः हर संडे, रेटः 100 रुपये की फुल प्लेट, 50 की हाफ, नजदीकी मेट्रो स्टेशनः पुल बंगश, करीब 2 किमी दूर

साफ-सफाईः खाने से पहले ग्राहकों के हाथ साफ कराने के लिए सेनेटाइजर रखते हैं। कढ़ाही का देसी घी रोज बदलते रहते हैं।

साउथ दिल्‍ली का बाबा नागपाल कॉर्नर
अमर कॉलोनी के गुरुद्वारे के पास लाजपत नगर पार्ट-4 की गुप्ता मार्केट में नुक्कड़ की दोमुंही दुकान ‘बाबा नागपाल कॉर्नर’ पर हरदम रौनकें छोले-भटूरे के दमदार स्वाद की गवाह हैं। आलू-कचौड़ी, पूरी-चना, चना-राइस आदि आइटम कई हैं, लेकिन छोटे-भटूरे तो एकदम खास हैं। साल 2000 में नारायण दास सोनी ने स्वाद का जादू क्या बिखेरा, आज उनके दोनों बेटे नरेश और लोकेश सोनी जायका बरकरार रखने में जुटे हुए हैं।

टाइमः सुबह 7:30 से दोपहर बाद 3 बजे तक ही, छुट्टीः कोई नहीं, रेटः 80 रुपये की फुल प्लेट, 50 की हाफ, नजदीकी मेट्रो स्टेशनः मूलचंद, करीब 1 किमी दूर

साफ-सफाईः तलने वाला रिफांइड हर 3-4 घंटे में बदलते रहते हैं। स्टाफ दस्ताने पहनकर काम करता रहता है।

कुछ और ठिकाने

सेंट्रल दिल्ली

  1. राधेश्याम सुभाष कुमार: अमृत कौर मार्केट, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने, पहाड़गंज, सुबह 8:30 से शाम 4:30 बजे तक।
  2. ओडियन स्वीट्स: भगत सिंह मार्केट, गोल मार्केट मेन रोड, सुबह 8:30 से शाम 4 बजे तक

वेस्ट दिल्ली

  1. सी. एल. कॉर्नर, फन सिनेमा के बगल की गली, मोती नगर मार्केट, सुबह 8:30 से शाम 5 बजे तक

नॉर्थ दिल्ली

  1. ओम दी हट्टी, शक्ति नगर चौक, सुबह 7:30 से रात 7 बजे तक
  2. नागपाल्स, आई. बी. मार्केट में, अशोक विहार फेज-वन, सुबह 8 से शाम 4 बजे तक

पुरानी दिल्ली

  1. मनोहर ढाबा, ओल्ड लाजपत राय मार्केट, मोती सिनेमा के बालकनी गेट के सामने, चांदनी चौक, सुबह 8:30 से रात 8 बजे तक
SOURCEhttps://navbharattimes.indiatimes.com/
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