Holi Mathura

इस बार होली 21 मार्च को है और इस दिन गुरुवार है। ऐसे में होली, दुल्हैंडी के बाद आपको शनिवार और रविवार की भी छुट्टी मिल रही है। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि साल 2019 की होली के साथ खास यादों को जोड़ा जाए तो यहां प्रस्तुत है आपके लिए उन खास 7 शहरों की लिस्ट, जहां होली की धूम में शामिल होने देश के कोने-कोने के साथ ही विदेशों से भी लोग पहुंचते हैं…

  • बरसाने की लठमार होली
    यह होली दुनियाभर में प्रसिद्ध है। जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि यह होली लठ (लाठी या डंडा) से भी खेली जाती है। मथुरा के पास स्थित बरसाना में यह त्योहार पूरे उल्लास के साथ मनाया जाता है। बरसाना की इस होली को खेलने के लिए भारत के अनेक हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी लोग आते हैं। यह होली इसलिए फेमस है क्योंकि यहां त्योहार का आनंद लेने के लिए लोग रंगों के साथ-साथ लट्ठ का भी प्रयोग करते हैं। लठमार होली की शुरुआत होली के मुख्य पर्व से एक सप्ताह पहले होती है। इस साल इसकी शुरुआत 15 मार्च से होगी। अगले दिन यह सेलिब्रेशन नंदगांव में पहुंचता है। लठमार होली से दो दिन पहले बरसाना पहुंचना ठीक रहता है क्योंकि इससे आप लड्डू होली का आनंद ले सकेंगे। इसमें लोग एक-दूसरे पर मिठाई (लड्डू) फेंकते हैं। साथ ही राधा-कृष्ण के भजन गाए जाते हैं।

ऐसे पहुंचे: दिल्ली से सीधे बरसाना जाने के लिए 9 सीधी ट्रेनें हैं। आप कोई भी चुन सकते हैं। इसके अलावा बस से इस सफर को तय करने में 4 घंटे का समय लगता है।

  • मथुरा-वृंदावन की फूलों वाली होली
    लठमार होली की तरह ही यह होली भी विश्व भर में लोकप्रिय और प्रसिद्ध है। इसमें लोग लठ के बजाय फूलों से खेलते हैं। यह होली पूरे सप्ताह तक चलती है और इसे खेलने के लिए दुनियाभर से सैलानी आते हैं। इसका सेलिब्रेशन वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर से शुरू होता है। इस बार 17 मार्च को एक-दूसरे पर फूल फेंकने से इसकी शुरुआत होगी।

ऐसे पहुंचे: दिल्ली से मथुरा सफर के लिए लगातार ट्रेनों की सुविधा उपलब्ध है, जो आपको डेढ़ से दो घंटे के अंदर मथुरा छोड़ देती हैं। बात करें बस की तो आपको 183 किलोमीटर के इस सफर के लिए लगभग 3.5 घंटे लगेंगे।

  • शांतिनिकेतन,पश्चिम बंगाल
    पश्चिम बंगाल में होली को बसंत उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत प्रसिद्ध बंगाली कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी। यह विश्व भारती यूनिवर्सिटी में खेली जाती है। यहां के छात्र आने वाले सैलानियों के लिए कई अनोखे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। इस दौरान लोगों पर रंग और गुलाल भी डाला जाता है। इस त्योहार का बंगाल की संस्कृति में एक खास महत्व है। बता दें कि इस साल कार्यक्रम की शुरुआत 20 मार्च से होगी।

ऐसे पहुंचे: अगर इस साल आप होली का त्योहार पश्चिम बंगाल में इंजॉय करना चाहते हैं तो इसके लिए आप ट्रेन का ही चुनाव करें। लगभग 1400 किलोमीटर की इस यात्रा के लिए दिल्ली से लगभग 8 लॉन्ग डिस्टेंस ट्रेनें चलती हैं।

  • आनंदपुर साहिब, पंजाब
    अगर आप पंजाबी स्टाइल में होली का त्योहार मनाना चाहते हैं तो आप आनंदपुर साहिब जाने का प्लान बना सकते हैं। सन 1701 में होला मोहल्ला त्योहार की शुरुआत हुई थी। इस त्योहार में सिख समुदाय के लोग कुश्ती, मार्शल आर्ट्स और तलवारों के साथ कई करतब दिखाते हैं। इस साल यह त्योहार 20 से 24 मार्च तक चलेगा।

ऐसे पहुंचे: पंजाब टूरिज्म होली के लिए 4 दिन का एक पैकेज देता है। दिल्ली से सीधे आनंदपुर साहिब जाने के लिए 3 ट्रेनें हैं। आप अपने समय और सहूलियत के हिसाब से यात्रा प्लान कर सकते हैं। बात करें बस की तो लगभग 315 किलोमीटर के इस सफर के लिए आप पंजाब रोडवेज की अनेक बस सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं।

  • रॉयल होली, उदयपुर
    होली की पूर्व संध्या पर उदयपुर में खास तरह से होली मनाई जाती है। इसे शाही होली कहते हैं। इस त्योहार में लोग आग जलाते हैं और शाही तरीके से होली सेलिब्रेट करते हैं। इस दौरान सिटी पैलेस में शाही निवास से मानेक चौक तक शाही जुलूस निकाला जाता है। इस जुलूस में घोड़े, हाथी से लेकर रॉयल बैंड शामिल होता है।

ऐसे पहुंचे: इसके लिए आप ट्रेन या बस (जिससे भी चाहें) से सफर कर सकते हैं। बात करें ट्रेन की तो दिल्ली और उदयपुर दोनों स्टेशनों के बीच करीब 13 ट्रेनें चलती हैं। आप अपनी टाइमिंग और सुविधा के हिसाब से ट्रेन का चुनाव कर सकते हैं।

  • जयपुर की शाही होली और गुलाल गोटे
    जयपुर में होली का त्योहार एक ऐसे पर्व के रूप में मनाया जाता है, जब वहां का शाही परिवार भी आम नागरिकों के साथ रंगों का आनंद लेता है। यहां स्थित सिटी पैलेस में होलिका दहन के साथ ही रंगों की बयार शुरू होती है। जयपुर के रहवासियों के साथ ही देसी-विदेशी पर्यटक भी सिटी पैलेस की होली में शरीक होते हैं। इस दौरान शाही परिवार गुलाल गोटे से रंग खेलता है। इसके साथ ही कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है।

ऐसे पहुंचे: ट्रेन के जरिए ज्यादातर कस्बों और शहरों से जयपुर कनेक्टेड है। यह और बात है कि बीच में आपको ट्रेन बदलनी पड़ सकती है। दिल्ली से जयपुर के लिए दिनभर में कई ट्रेन हैं आप अपनी सुविधा के हिसाब से टिकट बुक कर सकते हैं। शाम को 5 बजे के करीब जानेवाली डबलडेकर ट्रेन बेहतर विकल्प हो सकती है। यह रात 10 बजे तक जयपुर छोड़ देती है। दिल्ली में सराय काले खां बस स्टॉप से हर आधे घंटे में जयपुर के लिए बस सुविधा है। साथ ही प्राइवेट गाड़ी से भी जयपुर का सफर सुगम रहेगा।

  • गोवा में होली की धूम
    जी हां, गोवा में भी होली का त्योहार बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है। यहां इस त्योहार को शिगमोत्सव के नाम से जाना जाता है। यहां यह त्योहार करीब दो सप्ताह तक मनाया जाता है। इसमें फागोत्सव और होली दोनों की संस्कृतियों का समावेश होता है। गांव के देवी-देवताओं की पूजा करने के बाद इस उत्सव की शुरुआत होती है। कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है और अंतिम पांच दिनों में जूलूस और झांकियां निकाली जाती हैं। तभी गुलाल और रंग भी खेला जाता है। हालांकि इस त्योहार में गुलाल का उपयोग अधिक होता है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि खास होली वाले दिन गोवा के मुख्य बीच भी होली का उत्सव मना रहे होते हैं, स्थानीय लोगों और पर्यटकों के साथ।

ऐसे पहुंचें: गोवा हिंदुस्तान का प्रसिद्ध टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। देश के हर बड़े शहर से फ्लाइट और ट्रेन के जरिए गोवा जाया जा सकता है।

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