भारत में दलाई लामा निवास स्थान और विशाल तिब्बती बस्तियों के रूप में जाने वाला धर्मशाला एक छोटा सा हिल स्टेशन है जो हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा घाटी में धौलाधर पर्वत श्रंखला के ऊपर स्थित है। धर्मशाला में पर्यटकों के घूमने के लिए कई स्थान है अगर आप धर्मशाला घूमने जाएं तो इन स्थानों की सैर जरूर करें। यहां हम आपको धर्मशाली के कुछ प्रमुख पर्यटन स्थलों की जानकारी दे रहे हैं। साथ ही धर्मशाला को छुट्टियों के लिए चुनने से पहले आपको यह जानना होगा की धर्मशाला कैसे पहुंचे।

भागसुनाग
भागसुनाग मंदिर उतना ही पुराना है जितना डल झील है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसकी उत्पत्ति दैत्य राजा भागसु और नागों के देवता (नागराज) के बीच एक विशाल लड़ाई से हुई थी। हालांकि इसका कई बार पुनर्निर्माण किया गया है और यह वर्तमान में सफेद टाइलों से ढका हुआ है। इस जगह में कुछ तो ऐसा जरूर है जो अपनी ओर खींचता।

डल झील
पौराणिक कथाओं के अनुसार कैलाश पर्वत के नीचे पवित्र मणिमहेश झील में स्नान करते वक्त एक राजा ने अपनी एक सोने की अंगूठी खो दी थी। उसके बाद अंगूठी डल झील में आ गई। यह जल निकाय उन गरीब व्यक्तियों के लिए मणिमहेश (कैलाश में स्थित झील) मानी जाता थी। जो मोक्ष की प्राप्ति के लिए कैलाश तक स्नान के लिए नहीं जा सकते। हालांकि आज यह एक तालाब से ज्यादा कुछ नहीं है फिर भी स्थानीय लोगों के लिए यह झील पवित्र है। यह झील यात्रा के लायक है।

तिब्बतन इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट
थिएटर तिब्बती संस्कृति का एक बड़ा हिस्सा है। यहां पारंपरिक शैली में नाटक की प्रस्तुति की जाती है। दलाई लामा के कारण ही यह संरक्षित है जिन्होंने तिब्बती इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट की स्थापना की है। आज, यह केवल स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं बल्कि बाहर से आने वालों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। लोग यहां 10 दिनों तक चलने वाली वार्षिक शोटन महोत्सव को देखने के लिए आते हैं। तिब्बती इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट के सदस्यों द्वारा ड्रम, झांझ, शानदार वेशभूषा और दिलचस्प किरदारों का प्रदर्शन किया जाता है। ये नजारा देखने में काफी सुंदर होता है।

नोर्बुलिंग्का संस्थान
धर्मशाला के पास महत्वपूर्ण तिब्बती संस्थानों में से एक नोर्बुलिंग्का सदियों पुरानी तिब्बती वास्तुकला के आकर्षण का प्रतीक है और इसका नाम ल्हासा के निकट लामा के ग्रीष्मकालीन महल के नाम पर रखा गया। सात एकड़ में फैली इस पारंपरिक तिब्बती इमारत का निर्माण उन निपुण कारीगरों द्वारा किया गया था जो तिब्बत से दलाई लामा के साथ भाग गए थे। इस इमारत के परिसर में एक मंदिर, पुस्तकालय, कॉलेज, डिज़ाइन स्टूडियो, गेस्ट हाउस, और एक कैफे शामिल हैं। सुंदर बगीचों के बीच स्थित घुमावदार रास्तें, बहती नदियां, झरने, पुलों और तालाबों के साथ-साथ धौलाधार पहाड़ों का अदभुत नज़ारा दिखाई देता है। यहां आप गेस्टहाउस में ठहर सकते हैं और यहां की तिब्बती संस्कृति में खुद को डुबा सकते हैं।

नामग्यालमा स्तूप
मैक्लॉडगंज के बेहद करीब स्थित नामग्यालमा स्तूप एक पुरानी बौद्ध संरचना है। इसका निर्माण उन तिब्बती सैनिकों के सम्मान में करवाया गया था, जिनकी मौत तिब्बती स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुई थी। यह संरचना तीसरी शताब्दी के दौरान राजा अशोक द्वारा निर्मित संरचना की तरह दिखती है। स्तूप में शाक्यमुनी बुद्ध की एक छवि को चित्रित किया गया है। इंडो-तिब्बती शैली में निर्मित, बौद्ध स्तूप प्रार्थना पहियों से घिरा हुआ है जिसमें भक्त मंदिर के चारों ओर परिक्रमा करते हुए मंत्रो को पढ़ते हुए घुमाते हैं।

सेंट जॉन चर्च
महज 8 किलोमीटर और मैक्लॉडगंज से महज 10 मिनट की ढलान भरे रास्ते पर चलने के बाद पर आप खूबसूरत सेंट जॉन चर्च पहुंच जाएंगे। देवदार पेड़ों की शाखाओं से लिपटा, यह प्राचीन चर्च सेंट जॉन को समर्पित है, इस प्राचीन एंग्लिकन चर्च का निर्माण नव-गॉथिक स्थापत्य शैली में किया गया है और इसमें खूबसूरत बेल्जियम खिड़कियां लगी हैं। चर्च एक बड़ा पर्यटक केन्द्र है यहां हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। आप यहां रविवार को जुटने वाली भीड़ में शामिल होने की कोशिश करें और बगल में स्थित कब्रिस्तान जरूर जाएं जहां ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड एल्गिन की कब्र है। इनकी मृत्यु 1863 में धर्मशाला में हुई थी।

कैसे पहुंचें धर्मशाला
धर्मशाला सीधे तरीके से रेल और वायुमार्ग से देश और दुनिया के दूसरे शहरों से नहीं जुड़ा है। अधिकतर पर्यटक यहां आने के लिए सड़क मार्ग को ही चुनते हैं। इसलिए यहां आने से पहले यह अच्छी तरह जान लें कि धर्मशाला कैसे पहुंचे।

हवाई मार्ग
धर्मशाला सीधे तरीके से हवाई मार्ग के जरिए किसी भी शहर से नहीं जुड़ा है। इसका सबसे नजदीकी एयरपोर्ट गग्गल है जो धर्मशाला से केवल 13 किलोमीटर दूर है, लेकिन इस एयरपोर्ट के लिए भी सिर्फ दिल्ली से सीधी उड़ान है। दिल्ली से धर्मशाला पहुंचाने में फ्लाइट 1.30-1.45 घंटे का समय लेती है। देश के अन्य शहरों से धर्मशाला आना चाहते हैं तो आप चंडीगढ़ तक की फ्लाइट पकड़ सकते हैं। यहां से आगे का सफर आप सड़क के रास्ते कर सकते हैं।

रेल मार्ग
धर्मशाला में कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। यहां से सबसे नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन पठानकोट है, जिसकी धर्मशाला से दूरी 85 किलोमीटर है। यहां से आगे का सफर आप बस या टैक्सी से कर सकते हैं। धर्मशाला के नजदीक एक छोटा रेलवे स्टेशन कांगड़ा भी है लेकिन यहां अधिकतर बड़ी ट्रेन नहीं रुकती हैं। कांगड़ा से धर्मशाला की दूरी केवल 22 किलोमीटर है। इसके अलावा आप चंडीगढ़ तक की ट्रेन भी पकड़ सकते हैं।

सड़कमार्ग
दिल्ली, यूपी, हरियाणा और पंजाब के पर्यटक अधिकतर सड़क मार्ग से ही धर्मशाला जाते हैं यह धर्मशाला पहुंचने का पांरपारिक तरीका भी है। धर्मशाला घरेलू पर्यटकों के साथ विदेशी पर्यटकों के लिए भी खासा महत्वपूर्ण है। नैशनल हाइवे 154 और नैशनल हाइवे 504 धर्मशाला को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ते हैं। धर्मशाला के लिए दिल्ली, चंडीगढ़ और पठानकोट से लग्जरी वॉल्वो बस सेवा उपलब्ध है।

SOURCEhttps://navbharattimes.indiatimes.com
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